महाशिवरात्रि

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महाशिवरात्रि एक पवित्र पर्व है, जिसके बारे में कई पौराणिक कथाएं कही गई तथा दोहराई गई. माना जाता है कि, इसी दिन भगवन शिव का मद्यशिवरात्रि के समय रूद्र रूप में अवतरण हुआ था. परन्तु व्यापक रूप से यह मान्यता है कि

महाशिवरात्रि

भगवान शंकर एवं माता पार्वती इसी पवित्र दिन परिणय सूत्र में बंधे थे। महाशिवरात्रि का महत्व साल में आने वाली अन्य 12 शिवरात्रियों से कहीं अधिक माना जाता है।

महाशिवरात्रि

अधिकांश लोग इस तथ्य को विस्तार से नही जानते परंतु यह भी कहा जाता है कि, इस दिन प्रलय वेला में प्रदोष व्रत के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्माण्ड को अपने तीसरे नेत्र से समाप्त कर देते है,इसीलिए इसे महारात्रि अधवा कालरात्रि कहा जाता है। परंतु भारत में कुछ ही लोगो भगवान शिव के अवतरण एवं ब्रह्माण्ड के विनाश की मान्यताओं का भं है, विस्तृत रूप से लोग इस पर्व को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह दिवस के रूप में मनाते है।

महाशिवरात्रि

यह भी मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव ने समुन्द्र मंथन से निकला कालकूट विष अपने कंठ में धारण किया था।

भारत में यह त्यौहार व्यापक रूप से मनाया जाता है कई स्थानों पर भगवान शिव, माता पार्वती एवं समस्त परिवार की पूजा की जाती है। महाशिवरात्रि पर भगवान शंकर का जल, दुग्ध, एवं शहद से अभिषेक किया जाता है. तथा उन्हें बिलपत्र, धतूरा, पान, बैल, कैल के पत्ते, जलती धुप, धन, धान्य, इत्यादि समर्पित किये जाते है साथ ही उनके सम्मुख दीपक जला कर रखा जाता है. साथ ही साथ संपूर्ण रात्रि जागरण और हर्षोल्लास कर उनके प्रति अपनी आस्था व्यक्त की जाती है। कई लोग इस पर्व पर व्रत, दान  कर भगवान शंकर के प्रति अपनी  भक्ति एवं विश्वास का प्रमाण देते है. महत्वपूर्ण १२ ज्योतिर्लिंगों में श्रद्धालुओ की भीड़ रहती है तथा महाआरती कर ईष्वर को उनके प्रति श्रद्धा दर्शायी जाती है।

महाशिवरात्रि

मुख्य १२ ज्योतिर्लिंग एवं स्थान जहाँ वे स्थापित है: –

  1. सोमनाथ यह शिवलिंग गुजरात के काठियावाड़ में स्थापित है।

 

  1. श्री शैल मल्लिकार्जुन मद्रास में कृष्णा नदी के किनारे पर्वत पर स्थापित है श्री शैल मल्लिकार्जुन शिवलिंग।

 

  1. महाकाल उज्जैन के अवंति नगर में स्थापित महाकालेश्वर शिवलिंग, जहां शिवजी ने दैत्यों का नाश किया था।

 

  1. ॐकारेश्वर मध्यप्रदेश के धार्मिक स्थल ओंकारेश्वर में नर्मदा तट पर पर्वतराज विंध्य की कठोर तपस्या से खुश होकर वरदाने देने हुए यहां प्रकट हुए थे शिवजी। जहां ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थापित हो गया।

 

  1. नागेश्वर गुजरात के द्वारकाधाम के निकट स्थापित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग।

 

  1. बैजनाथ बिहार के बैद्यनाथ धाम में स्थापित शिवलिंग।

 

  1. भीमाशंकर महाराष्ट्र की भीमा नदी के किनारे स्थापित भीमशंकर ज्योतिर्लिंग।

 

  1. त्र्यंम्बकेश्वर नासिक (महाराष्ट्र) से 25 किलोमीटर दूर त्र्यंम्बकेश्वर में स्थापित ज्योतिर्लिंग।

 

  1. घुमेश्वर महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में एलोरा गुफा के समीप वेसल गांव में स्थापित घुमेश्वर ज्योतिर्लिंग।

 

  1. केदारनाथ हिमालय का दुर्गम केदारनाथ ज्योतिर्लिंग। हरिद्वार से 150 पर मिल दूरी पर स्थित है।

 

  1. काशी विश्वनाथ बनारस के काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग।

 

  1. रामेश्वरम्‌ त्रिचनापल्ली (मद्रास) समुद्र तट पर भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग।
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3 Replies to “एक पावन पर्व जिस दिन बहती है भक्ति की नदियाँ: महाशिवरात्रि”

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